Maa Kali Mantra: माँ काली मंत्र (पूर्ण व्याख्या और लाभ)

माँ काली मंत्र (Maa Kali Mantra) अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है. हमारी हिन्दू संस्कृति में साधना के कई मार्ग एवं कई सम्प्रदाएँ है. उनमें भी प्रधान रूप से या किसी न किसी रूप से प्रत्येक जन या प्रत्येक सनातनी हिन्दू जुड़ा हुआ है वह शक्ति उपासना है. भगवती दुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी, और महा सरस्वती का सम्मिलित स्वरुप है. लेकिन जब विशिष्ठ साधना की बात आती है तो दशमहाविद्याओं की साधना की जाती है और दशमहाविद्याओं में जो प्रथम महाविद्या है वह है भगवती काली माता जी की.

जैसा की हम सभी जानते है माँ काली बल और शक्ति की देवी है. अपने जीवन से भय, संकट, और दुःख दर्द को दूर करने एवं इच्छानुसार फल प्राप्त करने के लिए आपको काली माता को प्रसन्न करना चाहिए.

काली मंत्र (अर्थ सहित)। Kali Mantra (With Meaning)

हिन्दू धर्म में माँ काली को बहुत पूजा जाता है और ऐसा कहा जाता की सच्चे मन से माँ काली का ध्यान करने और माँ काली मंत्र (Maa Kali Mantra) जाप करने से आपकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती है. तो आईए आपको अवगत कराते है काली माता के निम्न मंत्रो से..

Maa Kali Mantra: माँ काली मंत्र
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।

वामपादोल्लसल्लोहलता कण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

यदि आपके जीवन में किसी भी प्रकार का संकट है जिससे आप मुक्ति पाना चाहते है या फिर किसी भी प्रकार की परेशानी को दूर करने के लिए माँ काली मंत्र (Maa Kali Mantra) का जाप जरूर करना चाहिए. यह मंत्र बहुत असरदार है और आपको फल प्रदान करता है.

काली महाकाली कालिके परमेश्वरी ।

सर्वानन्दकरी देवी नारायणि नमोऽस्तुते ।।

ॐ क्रीं काल्यै नमः

यह मंत्र काली माता को प्रसन्न करने के लिए है. इस मंत्र का जाप करने से आप मन चाहा वर प्राप्त कर सकते है या विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही हो तब भी माँ काली मंत्र (Maa Kali Mantra) का जाप कीजिए. आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी.

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिण कालिके ।

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । 

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा ।।

यदि आपको मृत्यु का भय है तो उससे बचने के लिए आपको काली मां के इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए. जिससे आपका मन भी शांत रहेगा और आप सकारात्मक महसूस करेंगे.

मां काली मंत्र (Maa Kali Mantra) जाप करने की विधि

काली मंत्र (Kali Mantra) बहुत प्रभावशाली मंत्र है. इसका जाप करने से आप पर माँ काली की कृपा बनी रहती है एवं आपकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है. तो आईए जानते है काली मंत्र (Kali Mantra) जाप करने की विधि के बारे में..

आसन

काली मंत्र (Kali Mantra) का जाप करने के लिए आप किसी भी आसन का प्रयोग कर सकते है. मंत्र जाप करते समय सदैव एक ही आसन का उपयोग करे. आसन हमेशा साफ़-सुथरा होना चाहिए. मंत्र जाप करने के बाद आपको इसे सुरक्षित स्थान पर रख देना है.

दिन या समय

काली मंत्र (Kali Mantra) जाप करने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा दिन माना जाता है. काली मंत्र (Kali Mantra) का जाप आप किसी भी शुक्रवार से प्रारम्भ कर सकते है. शुक्रवार के दिन किसी भी समय जैसे प्रातः, मध्याह्न, सायः या रात्रि काल को आप मंत्र जाप कर सकते है. शुक्रवार के आलावा किसी भी शुभ दिन से आप इस मंत्र का जाप आरम्भ कर सकते है.

माला

काली मंत्र (Kali Mantra) का जाप करने के लिए वैसे तो आप किसी भी माला का प्रयोग कर सकते है लेकिन रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना इसके लिए शुभ माना जाता है. एक दिन में आपको कम से कम एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए. मंत्र जाप करने के लिए सदैव एक ही माला का इस्तमाल करें एवं माला को साफ़ और सुरक्षित स्थान पर रखे.

मूर्ति या तस्वीर

काली मंत्र (Kali Mantra) जाप करते समय आपको माँ काली की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर जाप करना है और जाप से पहले गूगल धुप जला लेना है इसके बाद मंत्र जाप प्रारम्भ करे. अगर मूर्ति या फिर तस्वीर की व्यवस्था नहीं हो पा रही हो तो आप अपने घर के मंन्दिर में या शिव मंदिर, माँ काली मंदिर में जाकर भी मंत्र का जाप कर सकते हैं.

वस्त्र

काली मंत्र (Kali Mantra) का रोजाना जाप करने के लिए वस्त्र का कोई नियम नहीं है आप नहा कर साफ़ वस्त्र धारण कर के मंत्र जाप करें. लेकिन जब आप माँ काली की पूजा करते है तब आपको लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कर के पूजा करनी चाहिए यह अच्छा माना जाता है. माँ काली की पूजा में लाल एवं काली रंग की वस्तुओं का विशेष महत्त्व बताया जाता है.

माँ काली का स्वरुप

श्रृष्टि के प्रारम्भ में जब कही कुछ नहीं था. चारो तरफ तम (अंधकार) व्याप्त था. वह जो अंधकार था वही महाकाल है. और उन्ही महाकाल की शक्ति है भगवती काली माँ. यह श्रुष्टि के प्रारम्भ यानि की आदिकाल की बात है. इसलिए भगवती का एक नाम आध्या भी है. क्यूंकि श्रुष्टि का प्रारम्भ इनसे हुआ है इसलिए इन्हे प्रथमा भी कहा जाता है.

महाकाल संहिता के अनुसार प्रधान रूप से भगवती काली के नौ स्वरुप है.

  1. दक्षिणा काली
  2. भद्र काली
  3. शमशान काली
  4. गुह्य काली
  5. काल काली
  6. कामकला काली
  7. धन काली
  8. सिद्धि काली
  9. चण्ड काली

वैसे तो हमारे मनीषियों ने रात्रि के 84 विभाग किए है. और उन 84 विभागों के अनुसार ही भगवती माँ काली की 84 स्वरूपों में उपासना की जाती है. जो की बहुत विस्तारित विषय है.

तो आईए आपको माँ काली के दक्षिणा काली स्वरूप के बारे में विस्तार से बताते है.

दक्षिणा काली

भगवती दक्षिणा काली की उपासना कर उनकी कृपा कैसे प्राप्त हो सकती है इस सन्दर्भ में हम जानेंगे. लेकिन उससे पहले जैसे किसी शक्ति उपासना के साथ जो बात लागु होती है वह यहाँ भी लागु होती है. वही हमे यहाँ पर भी करना है जो उनके पति स्वरुप भैरव जी है पहले हम उनका स्मरण करेंगे.

औंग महाकालेश्वराय नमः ।।

इस मंत्र का आप एक बार जाप करके या फिर एक माला जाप कर के भगवान शिव को नमन करें. भगवान शिव का जो स्वरुप उज्जैन में महाकाल के रूप में विराजमान है. वही भगवती दक्षिणा काली के पति स्वरुप है. हमे उनको पहले नमन करना है और नमन करने के बाद विनियोग करना है.

महाकाल विनियोग:

अस्य मंत्रस्य भैरव ऋषिः, उष्णिक छन्दः, दक्षिण कालिका देवता,

ह्रीं बीजं, हूं शक्तिः, क्रीं कीलकं, दक्षिण कालिका देवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

यह विनियोग बोलकर जल छोड़ देना है. इसके बाद अपने कंठ पर ध्यान करते हुए मन में अर्थात मानसिक रूप से बिना उच्चारण किए 12 बार “क्रीं” मूल मंत्र का जप कीजिए. ध्यान रहे इसका उच्चारण आपको सही से करना है. कई लोग इसका उच्चारण क्रीम करते है लेकिन इसका सही उच्चारण “क्रीं”. इसमें अंत में “न” का उच्चारण होता है ना की ‘म’ का.

क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं ।।
क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं ।।

12 बार क्रीं बीज मंत्र का अपने कंठ पर ध्यान कर के मन में जप करेंगे. उसके बाद भगवती काली का ध्यान करेंगे जो है-

ध्यानम:

शवारूढां महाभिमां घोर दंष्ट्रा वर प्रदाम ।

हास्य युक्तां त्रिनेत्रां च कपाल कर्तृ कराम ।।

मुक्त केशीं लोल जिव्हां पिबन्तीं रुधिरन मुहुः।

चतुर्बाहु युतां देवीं वराभय करां स्मरेत ।।

इस तरह ध्यान कर के भगवती दक्षिणा काली को नमन करेंगे.

माँ दक्षिणा काली मंत्र जाप करने की विधि

माँ काली का जो प्रधान मंत्र है वह 22 अक्षर का है. लेकिन हमे सीधे उस मंत्र पर नहीं जाना चाहिए. जो लोग प्रारम्भ से शक्ति उपासना से जुड़े हुए है प्रारम्भ से जाप कर रहे है वे कर सकते है लेकिन जो लोग प्रारम्भ कर रहे है उन्हें 22 अक्षर के मंत्र का सीधे जाप करने से बचना चाहिए.

जो लोग प्रारम्भ कर रहे है उन्हें कम से कम 21 दिनों तक माँ काली के एकाक्षर बीज या मूल मंत्र “क्रीं” का रुद्राक्ष की माला से 11 माला का प्रतिदिन जाप करना चाहिए.

ये 21 दिन पूरे होने के बाद अगले 21 दिन तक तीन बीज अर्थात त्रिअक्षर मंत्र जो है “क्रीं क्रीं क्रीं” का जप हमे करना है. यदि आपके पास समय की उपलब्धता है तो 11 माला जाप करें अगर नहीं तो कम से कम 5 माला जाप अवश्य करें.

इसके बाद आपको भगवती दक्षिणा काली के 22 अक्षर वाले मूल मंत्र पर आना है और इसका जाप करना है. मंत्र इस प्रकार है:

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।

इस मंत्र का प्रारम्भ में 41 दिन तक जितना जाप हम कर सकते है करना चाहिए. कम से कम 3 माला जाप करना चाहिए और अधिक से अधिक जितना आपसे संभव हो आप कर सकते है. जो भी नियम आप प्रथम दिन ले लेते है जैसे 3 माला, 5 माला, 7 माला, 11 माला वही आपको पूरे 41 दिनों तक करना है. और इस मंत्र का जाप करने के बाद अंत में आपको प्रतिदिन अष्टभैरव स्तुति करना है.

यह सब करने के बाद, जिस प्रकार पहले हमने संकल्प किया था उसी प्रकार हम अंत में समर्पण कर देंगे उन्ही की कृपा प्राप्ति के लिए.

41 दिन पूरे होने के बाद जो कुछ भी आप अपनी श्रद्धा से कर सके वो आप कर सकते है जैसे कन्या भोजन. एवं यदि आप स्वयं कर सकते है तो ठीक या फिर किसी आचार्य जी को बुला कर इस 22 अक्षर मंत्र का दशांश हवन कर लेना चाहिए. फिर कन्या भोजन आदि करा कर भगवती दक्षिणा काली से उनके कृपा की प्रार्थना करके फिर नियमित उपासना में 1 माला, 3 माला जो भी आप कर सकें नियमित उपासना करते रहे.

मार्गदर्शन

यह शंका मन में जरूर आती है. प्रायः ये कहा जाता है कि दशमहाविद्याओं की उपासना तो बिना गुरुदीक्षा के नहीं मिलती और कोई ऐसे गुरु मिलते नहीं जिनसे दीक्षा प्राप्त हो सकें तब क्या करना चाहिए?

एक सरल सा एवं कई व्यक्तियों का अद्भुत प्रयोग जो भगवती काली कि उपासना में काम करता है जिसकी सहायता कोई भी ले सकता है जो है स्वामी रामकृष्ण परमहंस. एक साधारण युवक नरेंद्र को स्वामी विवेकानंद बनाने वाले थे स्वामी रामकृष्ण परमहंस. निकट समय में भगवती काली के ऐसे उपासक स्वामी रामकृष्ण परमहंस जैसा कोई उपासक नहीं हुआ. उन्हें भगवती काली का साक्षात्कार था.

यदि आप चाहते है कि आपको उचित मार्गदर्शन मिले तो ये स्वामी रामकृष्ण परमहंस किसी भी माध्यम से करें ये उनका उत्तरदायित्व हो जाएगा. आपको केवल एक काम करना है वह ये है कि गुरु पूर्णिमा पर आपको स्वामी रामकृष्ण परमहंस के चित्र का गुरु के रूप में पूजन करना चाहिए.

आप जब भी काली मंत्र (Kali Mantra) की उपासना प्रारम्भ करे तब आप स्वामी रामकृष्ण परमहंस का चित्र लेकर उनका पूजन आदि करके उनसे प्रार्थना या निवेदन करें कि मैं माँ काली मंत्र (Kali Mantra) की उपासना करना चाहता हूँ आप मुझपे कृपा करें और मेरा मार्गदर्शन करें. किसी न किसी माध्यम से आपको माँ काली मंत्र उपासना में मार्गदर्शन प्राप्त होगा ही होगा. ये बात इस पर भी निर्भर करती है कि आपकी आस्था कितनी है.

काली मंत्र (Kali Mantra) के लाभ

  • काली मंत्र (Kali Mantra) के जाप करने से आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है.
  • इस मंत्र से शत्रुओं का संहार होता है और आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते है.
  • इस मंत्र में बहुत शक्ति होती है जिससे आपके जीवन में सकारात्मकता आती है.
  • काली मंत्र (Kali Mantra) के जाप से आपकी कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है.
  • माँ काली के गुण, शक्ति, एवं तत्व आपके अंदर जागृत होने लगेंगे.
  • यह मंत्र आपकी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या सामाजिक सभी प्रकार कि बाधाएँ दूर करता है.

हमारे शब्द

काली मंत्र (Kali Mantra) बहुत लाभदायक मंत्र है. इस लेख में हमने आपको काली मंत्र (Kali Mantra) अर्थ, लाभ एवं जाप करने की विधि तथा माँ काली के नौ रूपों के बारे में बताया है और माँ दक्षिणा काली के रूप एवं मंत्रों के बारे में पूरी जानकारी दी है.

हम आशा करते है कि काली मंत्र (Kali Mantra) पर लिखा गया यह लेख आपको पसंद आया होगा, लेख को पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.